इस पुस्तक में कुल बीस आलेख हैं, जिसमें से पांच भक्ति आंदोलन पर, तीन कबीर पर, छह रैदास पर (एक आलेख में मीरा पर कुछ पृष्ठ लिखे गए हैं), एक अक्क महादेवी पर तथा पांच अन्य विषयों पर। इस पुस्तक का प्रथम आलेख ‘भक्ति-आंदोलन : एक पुनर्पाठ’ (2024) में आलोचक कंवल भारती तथ्यों तथा अपनी परिकल्पना के आधार पर भक्ति आंदोलन की तार्किक वैकल्पिक व्याख्या प्रस्तुत करते हैं।