"दलित साहित्य और राजनीति" (N. Singh द्वारा रचित) एक महत्वपूर्ण कृति है, जो हिंदी दलित साहित्य, उसकी ऐतिहासिक जड़ों और राजनीतिक चेतना (विशेषकर 1970-80 के बाद) का विश्लेषण करती है। यह पुस्तक बताती है कि कैसे दलित साहित्य केवल विधा नहीं, बल्कि संघर्ष और पहचान की राजनीति का हिस्सा है, जो सवर्ण वर्चस्व और जातिवाद को चुनौती देता है।