TY - BOOK AU - Meena, Rakesh Kumar TI - Surdas ka Kavya: (Gramey Aur Nagar Sanskriti Ka Dwandh) SN - 9789395226189 U1 - H3109 M58S PY - 2025/// CY - New Delhi PB - Adwait Prakashan KW - Kavita N2 - आज भारतीय समाज एक विकट संकट से गुजर रहा है। यह संकट जितना सामाजिक और राजनीतिक है उससे अधिक सांस्कृतिक है, क्योंकि आज के तकनीकी एवं भौतिकवादी युग में सूर काव्य की क्या प्रासंगिकता रह गई है? आज भूमण्डलीकरण और बाजारवादी दुनिया में जहां भारतीय जीवन विदेशी संस्कृति को आत्मसात कर रहा है। ऐसे में सूर की कविता की क्या उपयोगिता है? सूर के अनुसार गाँव के जीवन और व्यवहार में सहजता, ईमानदारी, सच्चाई है, जबकि शहर अनैतिकता, छल-प्रपंच और चालाकी का गढ़ है। आज भी शहर सत्ता और शक्ति के केन्द्र के साथ-साथ, अत्याचार और शोषण का गढ़ छल और प्रपंच का प्रतीक है, वैसे सही भी है कि शहर जितना हमें देता है उससे कहीं अधिक हमसे छीन लेता है। सूरदास की कविता में नवीन तत्त्वों की खोज प्रकारान्तर से आधुनिक संदर्भों में उसकी प्रासंगिकता की खोज है, और इस खोज के लिए हमारा प्रयास निरंतर रहना चाहिए, समय के जिस मोड़ पर आज हमारी सभ्यता तथा संस्कृति पहुंच चुकी है ER -