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020 _a978-8131614518
040 _aRCL
082 _a305.8 D53M.3
100 _aDewan, Hriday Kant
_930656
245 _aAsamanta Reader-3
_bMahila, Dalit Aur Aadivaasi Asamantaayein
_c/ Hriday Kant Dewan, Sanjay Lodha, Arun Chaturvedi, Manoj Rajguru
260 _aJaipuri:
_bRawat Publication,
_c2025.
300 _axiv, 285p. ; 25cm.
500 _aमहिला दलित और आदिवासी असमानताएँ सम्पादन : हृदय कान्त दीवान | संजय लोढ़ा | अरुण चतुर्वेदी | मनोज राजगुरु
505 0 _aखण्ड 1 भारतीय असमानताएँ: महिलाएँ 1 भारतीय नारीवाद और भिन्नता का प्रश्न: वर्ग, जाति और जेंडर का अन्तःसम्बन्ध विजय कुमार झा 2 कब तक हाशिए पर रहना होगा! विमल थोरात 3 दलित महिलाओं की त्रासदी जितेन्द्र प्रसाद 4 महिला अधिकार: संविधान तथा सरकारें शील के. असोपा 5 समता आधारित राजनीति वेफ बिना स्त्राी मुक्ति असम्भव निशा शिवूरकर 6 नारीवाद के मुद्दे कमला भसीन 7 भारत में महिला सशक्तिकरण: 73वें तथा 74वें संवैधानिक संशोधन के विशेष सन्दर्भ में बी.एम. शर्मा खण्ड 2 भारतीय असमानताएँ: दलित 8 गोमांस सेवन: अस्पृश्यता का मूलाधार भीमराव अम्बेडकर 9 कांशीराम और उत्तर-अम्बेडकर दलित-विमर्श अरविन्द कुमार 10 निर्बलों के लिए भेदभाव पी. साईंनाथ 11 लोकतंत्र का भिक्षु गीत: अति-उपेक्षित दलितों के अध्ययन की एक प्रस्तावना बद्री नारायण 12 बंसोड़, बाँस और लोकतंत्र रमाशंकर सिंह 13 दलित उपनिवेशवादी इतिहास और ब्राह्मणवादी व्याख्या एस.एल. दोषी 14 दलित की चिन्ता योगेन्द्र यादव 15 दलित दशा और दिशा ओमप्रकाश वाल्मीकि 16 दलित वर्ग एवं दलित नेतृत्व भगवान दास 17 पंचायती राज का व्यावहारिक स्वरूप: दलित सन्दर्भ में जॉर्ज मैथ्यू एवं रमेश सी. नायक 18 भारतीय सामाजिक यथार्थ और दलितों वेफ मानवाधिकार का प्रश्न पी.जी. जोगदन्ड 19 भारतीय राजनीति का स्याह दलित चेहरा शेफाली बार्थोनिया 20 दलित सोच: शोषित समाज की पुनर्रचना का आह्नान नरेश भार्गव खण्ड 3 आदिवासी और असमानता 21 भारतीय जनजातियों के सन्दर्भ में वुछ विचार विनय कुमार श्रीवास्तव 22 विद्यालयों में दलित या आदिवासी बच्चा होने का क्या अर्थ है?: छः राज्यों के गुणात्मक अध्ययन का संश्लेषण विमला रामचन्द्रन एवं तारामणि नाओरेम 23 आदिवासी नक्सलवादी और भारतीय लोकतंत्र रामचन्द्र गुहा 24 पिछड़ी जातियों की उत्तर-मण्डल राजनीति ज्योति मिश्रा एवं आशीष रंजन
520 _aआज के संदर्भ में असमानता एक अहम मुद्दे के रूप में उभरी है। राष्ट्रों, क्षेत्रों, कौमों और व्यक्तियों के बीच असमानताओं के बदलते संदर्भ पर न सिर्फ विचार हो रहा है वरन् कई प्रकार के तथ्य आधारित शोध भी विमर्श को समृद्ध कर रहे हैं। यह संकलन, असमानता पर विभिन्न महत्त्वपूर्ण वैश्विक सैद्धांतिक दृष्टियों को प्रस्तुत करता है। असमानता की सैद्धान्तिक विवेचनाओं से जुड़े नौ आलेख प्राकृतिक बनाम सामाजिक असमानता के परिप्रेक्ष्यों के बीच के संघर्ष तथा इसके व्यक्तिवाद व सामूहिकता व ‘सामाजिक पूँजी की अवधारणा’ से संबंध और श्वेत तथा अश्वेत के बीच के भेदभाव का विश्लेषण करते हैं। सैद्धांतिक रूप से असमानता को उदारवाद और सामाजिक न्याय के साथ रखकर देखने पर धार्मिक स्वतंत्रता, विशिष्टता के सिद्धान्त, लोक-बुद्धि और विवेक जैसी संकल्पनाओं पर विचार आवश्यक हो जाता है। बाकि के सात लेख असमानता की भारतीय दृष्टि व उसकी भारतीय परिस्थिति को समझने का प्रयास है। लेख दूसरी दुनिया अर्थात् परलोक के विचार के असमानता के साथ अंतर्संबंध और ‘सामाजिक न्याय’ के अर्थ में गरीब और अमीर के बीच की खाई तथा उनके बीच के व्यवहार पर लक्षित हैं। संकलन यह बात सामने रखता है कि आधुनिक भारतीय राजनीतिक चिन्तन के तहत ‘व्यक्ति, समाज और न्याय’ की सम्बद्धता को परखना महत्त्वपूर्ण है व इस पर व्यापक मंथन व चिंतन की आवश्यकता है। आधुनिक प्रजातांत्रिक व्यवस्थाओं की एक उदारवादी संकल्पना असमानता को खत्म कर समानता स्थापित करना है। ‘जीवन में समानता’ एक ऐसा वैश्विक सामाजिक स्वतः सिद्ध आदर्श, मूल्य एवं लक्ष्य है, जिसके प्रति सभी समाजों में प्रतिबद्धता दिखती है। समानता तक पहुंचने के अन्तर्विरोधी आयाम भारत के इस यथार्थ में प्रकट दिखते हैं कि राजनीतिक घोषणाओं, संवैधानिक प्रावधानों, व अकादमिक विमर्शों के बावजूद, सामाजिक यथार्थ में असमानता खत्म करने को मूर्त रूप देने की सम्भावनाएँ क्षीण हो रही हैं। यह संकलन इन्हीं सभी विमर्शों को प्रस्तुत करता है।
546 _aHindi
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700 _aSanjay, Lodha
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700 _aChaturvedi, Arun
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