| 000 | 01558nam a22002177a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 003 | RNL | ||
| 005 | 20260316055509.0 | ||
| 008 | 260316b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a978-9392998935 | ||
| 040 | _aRCL | ||
| 082 | _aH3109 R18B | ||
| 100 | _aRai, Anil | ||
| 245 |
_aBhakti Samvedana Aur Manav Mulya _c/Anil Rai |
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| 260 |
_aNew Delhi: _bNayee Kitab Prakashan, _c2024. |
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| 300 | _a171p. ; 19cm. | ||
| 500 | _aभक्ति संवेदना और मानव मूल्य | ||
| 520 | _aभक्ति संवेदना ने मानव मूल्यों की स्थापना में महती भूमिका निभाई है। जाति–पाति, अमीर–गरीब आदि विषमतामूलक बातों की उपेक्षा करते हुए भक्त कवियों ने समतामूलक समाज की परिकल्पना की जिसमें समाज के सभी लोग समान भूमि पर विचरण कर सकें। भक्ति की निर्गुण और सगुण–दोनों ही धाराओं ने भक्ति संवेदना के आधार पर मानव मूल्यों को सर्वोपरि रखा, भले ही उनकी साधना–पद्धति अलग–अलग रही। | ||
| 546 | _aHindi | ||
| 650 |
_aAlochana/आलोचना _930675 |
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| 942 | _cBK | ||
| 999 |
_c47922 _d47922 |
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