000 03396nam a22002537a 4500
003 RNL
005 20260316062130.0
008 260316b |||||||| |||| 00| 0 eng d
020 _a9789348650368
040 _aRCL
082 _a070 SI50B
100 _aSingh, Shaheed Bhagat
_930678
245 _aMain Nastik Kyon Hun :
_bTatha Anya Lekh
_c/ Shaheed Bhagat Singh, Sudhir Vidyarthi..Ed
260 _aNew Delhi:
_bNayee Kitab Publishers,
_c2025.
300 _a152p. ; 23cm.
490 _aWhy I am an Atheist
500 _aमै नास्तिक क्यों हु
520 _a'मैं नास्तिक क्यों हूँ' एक प्रमुख भारतीय समाजवादी भगत सिंह द्वारा लिखी गई एक पुस्तक है, जिसे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारियों में से एक माना जाता है। पुस्तक में भगत सिंह ने धर्म की अस्वीकृति और नास्तिकता को गले लगाने के बारे में लिखा है। उनका तर्क है कि धर्म शासक वर्गों द्वारा जनता का दमन करने तथा सामाजिक और राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक उपकरण है। वह ब्रह्मांड के निर्माता और अनुचर के रूप में एक देवता के विचार की भी आलोचना करते हैं। वे यह सुझाव देते हैं कि ब्रह्मांड और उसके नियमों को वैज्ञानिक जाँच के माध्यम से समझाया जा सकता है। भगत सिंह धर्म की अपनी आलोचनाओं के अलावा सामाजिक न्याय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और वैज्ञानिक प्रगति के महत्त्व के बारे में भी लिखते हैं। वे नास्तिकता को एक स्वतंत्र और समान समाज के एक आवश्यक घटक के रूप में देखते हैं, जिसमें लोग धार्मिक हठधर्मिता की बाधाओं से मुक्त होकर अपने लिए सोचने और अपनी पसंद बनाने में सक्षम होते हैं। कुल मिलाकर, 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' भगत सिंह की राजनीतिक और वैचारिक मान्यताओं का एक घोषणापत्र है ।
546 _aHindi
650 _aRevolution
_930679
650 _aReligion & Politics
_930680
700 _aVidyarthi, Sudhir ..Ed
_930681
942 _cBK
999 _c47924
_d47924