000 03239nam a22002057a 4500
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020 _a9788119141623
040 _aRCL
082 _aH309 C324H
100 _aChatursen, Acharya
245 _aHindi Sahitya Ka Praichay
_c/ Acharya Chatursen
260 _aNew Delhi:
_bAnanaya Prakashan,
_c2024.
300 _a152p. ; 22cm.
500 _aहिंदी साहित्य का परिचय
505 0 _aप्रथम अध्याय: 1. हिन्दी साहित्य का प्रारम्भिक स्प 2. सिद्ध-सामंत युग, 3. इस युग के सिद्ध, जैन और नाथ साहित्य, 4. सिद्ध-सामन्त युग का लोक साहित्य, 5. वीरगाथा और रासो साहित्य 6. शार्गधर, खुसरो और विद्यापति, 7. चारण साहित्य दूसरा अध्याय : 1. भक्ति-काल, २. निर्गुण भक्ति- ज्ञानारूपी शाखा 3. ज्ञानमार्ग प्रेममागी शाखा, 4. सगुण घारा-कृष्ण-भक्ति, 5. भक्ति मार्ग- रामभक्ति शाखा तीसरा अध्याय : अलंकृत काल: 1. श्रृंगार का प्रारम्भ, 2. रीति-साहित्य का निर्माण, 3. श्रृंगार काल पर एक दृष्टि चौथा अध्याय: आंग्ल-प्रभाव-काल: 1. आंग्ल-आगमन, 2. पूर्व काल का गद्य, 3. हिन्दी गय के चार उन्नायक, 4. अंग्रेजी भाषा और पाश्चात्य संस्कार पांचवां अध्याय : भारतेन्दु काल : 1. भारतेन्दु, उनकी प्रतिभा और साहित्य, 2. इस युग के साहित्य-शिल्पी, 3. भारतेन्दु काल की साहित्य-संपदा छठा अध्याय: त्रिविध प्रभाव-काल 1. त्रिविध प्रभाव, 2. इस युग के साहित्य जन, 3. इस काल का साहित्य धन सातवां अध्याय : द्विवेदी-युग : 1. सिंहावलोकन, 2. द्विवेदी और उनके कार्य, 3. इस काल के साहित्य परिजन, 4. गद्य-पद्य आठवां : नव-युग : 1. सिंहावलोकन, 2. गद्य में भावावेश, 3. पद्य में महानाद, 4. गद्य-भूमि, 5. पद्य-भूमि, पत्र और राष्ट्रभाषा नवां अध्याय : महत्तर-युग
546 _aHindi
942 _cBK
999 _c47935
_d47935