000 04084nam a22002177a 4500
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020 _a9788174531933
040 _aRNL
082 _a491.4301 M69B
100 _aMishra, Naresh
_931069
245 _aBhasha Vigyan aur Hindi Bhasha
_c/ Naresh Mishra
246 _aभाषा विज्ञान और हिन्दी भाषा- Linguistics and Hindi Language
260 _aNew Delhi:
_bSanjay Prakashan,
_c2026.
300 _a390p. ; 21cm.
520 _aभाषा मनुष्य की परम उपलब्धि है, क्योंकि भावाभिव्यक्ति का प्रमुख आधार है। भाव आदान-प्रदान से ही समाज का स्वरूप सामने आया है। भाषा और समाज अन्योन्याश्रित हैं। भाषा का उद्भव और विकास समाज में ही हुआ है। मनुष्य की उन्नति और प्रगति का सर्वोत्तम माध्यम भाषा है। सामाजिक स्तर के आधार पर भाषा का स्वरूप विकसित होना स्वाभाविक है। भाषा के व्यवस्थित और मानक आधार पर मनुष्य को विकास पथ मिल जाता है। इस प्रकार मनुष्य को भाषा के स्वरूप, उपयोग और महत्त्व को गंभीरता से हृदयंगम करना चाहिए। साहित्य ही नहीं ज्ञान विज्ञान से संबंधित समस्त चिंतन, मनन, लेखन और शोध भाषा के ही आधार पर संभव है। आदि काल से लेकर वर्तमान वैज्ञानिक तथा तकनीकी युग में भी व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गति-प्रगति की आधार भूमि भाषा ही है। इस प्रकार भाषा अध्ययन का महत्त्व स्वतः सिद्ध है। भाषा-चिंतन, मनन और अध्ययन के लिए क्रमबद्ध, व्यवस्थित और प्रयोगात्मक पद्धति अपनाना अनिवार्य होता है। इसीलिए भाषा-अध्ययन को भाषाविज्ञान की संज्ञा दी जाती है। जीवन में भाषा के गुरुतर महत्त्व को दृष्टिगत कर अध्ययन के लिए एकाग्र मन और गंभीर मानसिकता की आवश्यकता होती है। सामान्यतः लोगों की धारणा बन गई है कि भाषा अध्ययन अन्य विषयों के अध्ययन से कहीं अधिक जटिल है। वास्तव में यह मातृभाषा के सैद्धांतिक पद्धति के विशेष अध्ययन से जुड़ा विचार है। आवश्यकता है भाषा को जीवन से जोड़कर व्यावहारिक अध्ययन और शोध करने की। इससे अपनेपन की अनुभूति होगी और रसात्मक बोध भी होगा।
546 _aHindi.
650 _aLinguistic
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