| 000 | 01474nam a22002177a 4500 | ||
|---|---|---|---|
| 003 | RNL | ||
| 005 | 20260406101714.0 | ||
| 008 | 260406b |||||||| |||| 00| 0 eng d | ||
| 020 | _a9789395014144 | ||
| 040 | _aRCL | ||
| 082 | _aH32 K34V | ||
| 100 |
_aKaur, Jyoti _931086 |
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| 245 |
_aVichitra Natak : _bEk Adhayan _c/ Kaur, Jyoti |
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| 246 | _aविचित्र नाटक: एक अध्ययन | ||
| 260 |
_aNew Delhi: _bAkshar Publication & Distribution, _c2022. |
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| 300 | _a216p. ; 22cm. | ||
| 520 | _a बचितर नाटक गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा रचित दशम ग्रंथ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे उनकी आत्मकथा माना जाता है। इसमें गुरुजी ने अपने पूर्व जन्म, परिवार (बदी और सोढी वंश), आध्यात्मिक दर्शन और 1696 ईस्वी तक के जीवन के प्रमुख युद्धों का वर्णन किया है। यह काव्य 'अद्भुत नाटक' के रूप में प्रसिद्ध है जो भक्ति और वीर रस का मिश्रण है। | ||
| 546 | _aEnglish | ||
| 650 |
_aगुरु गोबिंद सिंह जी _931087 |
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| 942 | _cBK | ||
| 999 |
_c48095 _d48095 |
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