/ 3



Sumitranandan Pant

Nagendra

Sumitranandan Pant /Nagendra - New Delhi: Ananya Prakashan, 2025. - 160p. ; 23cm.

इस पुस्तक में संकलित विषयों के कुछ अंशों को मैं श्री नगेन्द्र जी के मुख से सुन चुका हूँ । उन्होंने पर्याप्त अध्ययन एवं मनन के पश्चात् अत्यंत सहृदयता के साथ मेरी रचनाओं के गुण–दोषों का विवेचन किया है । अपने प्रयास में उन्हें कहाँ तक सफलता मिली है, इसका निर्णय पाठक ही कर सकते हैं । मुझे इतना ही कहना है कि उन्होंने मेरे साथ काफी सहानुभूति रखी है । उनके दृष्टिकोण से अपनी रचनाओं के गुण–दोषों को परखने का अवसर पाकर मुझे आनंद मिला और अपनी कमज़ोरियों को समझने में सहायता मिली, जिसके लिए मैं उनका कृतज्ञ हूँ । श्री नगेन्द्र जी स्वयं भी कवि हैं । अपने कवि–हृदय के माधुर्य से मेरे कवि को और भी सुंदर बनाकर वे पाठकों के सामने प्रस्तुत कर सके हैं, इसमें मुझे संदेह नहीं । —सुमित्रानंदन पंत


Hindi

9788119141340


Alochana

H3109 P23SN

Find us on the map

Contact Us

RAMANUJAN COLLEGE UNIVERSITY OF DELHI, KALKAJI, NEW DELHI 110019
library@ramaanujan.du.ac.in
011-35002219
https://library.ramanujancollege.ac.in/
ramanujancollegelibrary
                                 
Customized & Maintained by Department of Library