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Dalit Atmakatha Ki Jamin (Record no. 47820)

MARC details
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003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER
control field RNL
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008 - FIXED-LENGTH DATA ELEMENTS--GENERAL INFORMATION
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020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER
ISBN 9788196264208
040 ## - CATALOGING SOURCE
Original cataloging agency RCL
082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER
Classification number H308624 K98D
100 ## - MAIN ENTRY--PERSONAL NAME
Personal name Kumar, Arvind
245 ## - TITLE STATEMENT
Title Dalit Atmakatha Ki Jamin
Statement of responsibility, etc / Arvind Kumar ,Nandi Patodiya
260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC.
Place of publication Delhi:
Name of publisher Hans Prakashan,
Year of publication 2023.
300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION
Number of Pages xviii, 277p. ; 22cm.
500 ## - GENERAL NOTE
General note दलित आत्मकथा की जमीन (Land of Dalit Autobiography )
520 ## - SUMMARY, ETC.
Summary, etc दलित साहित्य का आंदोलन दलितों के सांस्कृतिक जागरण का आंदोलन है। व्यक्ति और समाज, जीवन के परिवर्तन, परिष्करण एवं प्रगति का सजग स्वरूप दलित साहित्य के आंदोलन में परिलक्षित होता है। इसमें संस्कृति और हमारी सांस्कृतिक विरासत, सृष्टि, सृजन पहचान और सांस्कृतिक अन्तःसम्बन्धों की अवधारणा का प्रत्येक पहलू भी सन्निहित है, जो पहले की अपेक्षा कहीं अधिक प्रासंगिक है। अर्जेन्टीना के लेखक 'जूनियों कोर्तजार' ने एक बार कहा था- 'हम जिसे संस्कृति कहते हैं, वह मूल रूप में अपनी पूरी सशक्तता के साथ हमारी पहचान के अस्तित्व और उपयोग के सिवा अन्य कुछ भी नहीं है। इस अस्तित्व का मूल इतिहास में है, जिसकी जान-पहचान एक अलगाव बिन्दु है।' भारतीय साहित्य, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत में यही अलगाव बिन्दु दलित साहित्य की पहचान है। दलित साहित्य डॉ. अम्बेडकर के संघर्ष को आगे बढ़ाने वाला आंदोलन है।<br/><br/>इस आंदोलन के उद्भव और विकास के पीछे घृणा, क्रोध, आक्रोश, पीड़ा, विद्रोह और क्रांति का ऐसा इतिहास है, जो साधारणतः बहुत कम दृष्टिगत होता है। सदियों से पीड़ित समाज पर जो अन्याय और अत्याचार किया जाता रहा है। उसका विरोध और दलित जीवन का चित्रण करने वाला साहित्य ही दलित साहित्य है। ... 'दलित शब्द' व 'दलित साहित्य' पर विभिन्न विद्वानों के विचार व मत से अवगत होने के बाद इस निष्कर्ष पर पहुँचा जा सकता है कि वास्तव में दलित साहित्य जीवन की दर्दनाक तड़पन है। रोंगटे खड़ा कर देने वाला साहित्य है। जिसकी पीड़ा जिजीविषा उनके साहित्य में देखा जा सकता है चाहे वह आत्मकथा हो, उपन्यास हो, कहानी हो, कविता हो कोई भी विधा हो जिसमें उसका एक लक्ष्य दिखाई पड़ता है, वह है- सामाजिक परिवर्तन की मांग।
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term Crticism.
700 ## - ADDED ENTRY--PERSONAL NAME
Personal name Patodiya, Nandi
942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA)
Koha item type Books
Holdings
Full call number Accession Number Lost status Damaged status Price effective from Koha item type Not for loan Collection code Withdrawn status Home library Current library Shelving location Date acquired Cost, normal purchase price
H308624 K98D 65505     02/20/2026 Books   Hindi Books   RCL RCL General Stacks 12/15/2025 995.00

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