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Madhya Asia Ka Itihas (Record no. 47910)

MARC details
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003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER
control field RNL
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020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER
ISBN 9788119141364
040 ## - CATALOGING SOURCE
Original cataloging agency RCL
082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER
Classification number H309 S63M.1
100 ## - MAIN ENTRY--PERSONAL NAME
Personal name Sankrityayan, Rahul
245 ## - TITLE STATEMENT
Title Madhya Asia Ka Itihas
Sub Title Vol-1
Statement of responsibility, etc / Rahul Sankrityayan
260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC.
Place of publication New Delhi:
Name of publisher Ananya Prakashan,
Year of publication 2024.
300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION
Number of Pages 552p.
490 ## - SERIES STATEMENT
Series statement मध्य एशिया का इतिहास : भाग – 1
500 ## - GENERAL NOTE
General note साहित्‍य अकादेमी पुरस्कार (1958) राहुल सांकृत्यायन
520 ## - SUMMARY, ETC.
Summary, etc भारत के इतिहास की जगह मध्य एशिया के इतिहास पर मैंने क्यों कलम उठाई, यह प्रश्न हो सकता है। उत्तर आसान है। भारत के इतिहास पर लिखनेवाले बहुत हैं। जिसका अभाव है, उसकी पूर्ति करना जरूरी था, यही विचार इस प्रयास का कारण हुआ। अपनी यात्राओं में मैं रूस और मध्य एशिया के सम्पर्क में आया, उनके ऊपर कितनी ही पुस्तकें लिखीं और अनुवादित कीं। उसी समय विचार आया, आधुनिक ऐतिहासिक घटनाओं को पिछले इतिहास की पृष्ठभूमि में देखना चाहिए। इस तरफ आगे बढ़ा, तो यह भी मालूम हुआ मध्य एशिया का इतिहास हमारे देश के इतिहास से बहुत घनिष्ठ सम्बन्ध रखता है।<br/>द्रविड़ (फिनो–द्रविड़) जाति – जिसने मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के भव्य नगर और यशस्वी सिन्धु-सभ्यता प्रदान की का सम्बन्ध मध्य एशिया से भी था। हाल के पुरातात्त्विक अनुसन्धान बतलाते हैं कि आर्यों का सम्पर्क द्रविड़़ जाति से सबसे पहले सिन्धु-उपत्यका में नहीं, बल्कि ख्वारेज्म में हुआ था। वहाँ पराजित करके उनका स्थान ले आर्य भारत की ओर बढ़े। उनका बढ़ाव पिछली विजित भूमि को बिना छोड़े आगे की तरफ होता रहा, इसलिए भारतीय आर्यों की परम्परा में अपने पुराने छोड़े हुए स्थान का उल्लेख नहीं पाया जाता। आर्यों की अनेक लहरों के बाद ग्रीक लोगों ने भी बाख्त्रिया से आकर भारत के कुछ भाग पर शासन किया। शक-कुषाण भी वहाँ से ही होकर आये। तथाकथित हूण-हेफताल-भी मध्य एशिया से भारत की ओर बढ़े। तुर्क और इस्लाम भी वहाँ से चलकर भारत आया। इन शासकों और उनकी जातियों के इतिहास का एक भाग मध्य एशिया में पड़ा रहा, जिसे जाने बिना हम अपने इतिहास को समझने में गलती कर बैठते हैं। इस दृष्टि से भी मुझे इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा मिली। —राहुल सांकृत्यायन
546 ## - LANGUAGE NOTE
Language note Hindi
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term Hindi literature
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term Historical book
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term Buddhism
650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM
Topical Term Historical trave
942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA)
Koha item type Books
Holdings
Full call number Accession Number Serial Enumeration / chronology Volume Lost status Damaged status Price effective from Koha item type Not for loan Collection code Withdrawn status Home library Current library Shelving location Date acquired Cost, normal purchase price
H309 S63M.1 65605 Vol-1 0000-00-00 00:00:00     03/13/2026 Books   Hindi Books   RCL RCL General Stacks 12/26/2025 1250.00

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