Asamanta Reader-2 (Record no. 47914)
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| 000 -LEADER | |
|---|---|
| fixed length control field | 09440nam a22002657a 4500 |
| 003 - CONTROL NUMBER IDENTIFIER | |
| control field | RNL |
| 005 - DATE AND TIME OF LATEST TRANSACTION | |
| control field | 20260313061011.0 |
| 008 - FIXED-LENGTH DATA ELEMENTS--GENERAL INFORMATION | |
| fixed length control field | 260313b |||||||| |||| 00| 0 eng d |
| 020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER | |
| ISBN | 978-8131614495 |
| 040 ## - CATALOGING SOURCE | |
| Original cataloging agency | RCL |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | 305.8 D53B.2 |
| 100 ## - MAIN ENTRY--PERSONAL NAME | |
| Personal name | Dewan, Hriday Kant |
| 245 ## - TITLE STATEMENT | |
| Title | Asamanta Reader-2 |
| Sub Title | Bharat Mein Asamantaon Ke Vividh Aayam |
| Statement of responsibility, etc | / Hriday Kant Dewan, Sanjay Lodha, Arun Chaturvedi, Manoj Rajguru |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. | |
| Place of publication | Jaipuri: |
| Name of publisher | Rawat Publication, |
| Year of publication | 2025. |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Number of Pages | xv, 228p. ; 25cm. |
| 500 ## - GENERAL NOTE | |
| General note | भारत में असमानताओं के विविध आयाम सम्पादन : हृदय कान्त दीवान | संजय लोढ़ा | अरुण चतुर्वेदी | मनोज राजगुरु |
| 505 0# - FORMATTED CONTENTS NOTE | |
| Formatted contents note | खण्ड - 1<br/>विषमताओं के भारतीय संदर्भ<br/>1 गैर-बराबरी की अदृश्य पाठषाला: कर्मफल का सिद्धान्त-नन्द चतुर्वेदी<br/>2 निर्बलों के लिए भेदभाव-पी. साईनाथ<br/>3 मैं बौद्ध क्यों बना? -भीमराव अम्बेडकर<br/>4 नई सदी, संरचना और सामाजिक सरोकार -नरेष भार्गव<br/>5 सामाजिक न्याय हेतु जरूरी है आरक्षण-रामषिवमूर्ति यादव<br/>6 आरक्षण: एक वैकल्पिक प्रस्ताव-सतीष देषपाण्डे एवं योगेन्द्र यादव<br/>7 नस्ल के आईने में जाति का अक्स-धीरूभाई सेठ<br/>8 केन्द्र द्वारा नियोजित असमानताएँ-मोहन गुरुस्वामी<br/><br/>खण्ड - 2<br/>भारतीय असमानताएँ: शिक्षा के संदर्भ<br/>9 भारत में उच्च षिक्षा: गुणवत्ता, सुगमता तथा भागीदारी से जुड़े मुद्दे-सुखदेव थोरात<br/>10 सबके लिए षिक्षा: रास्ते की चुनौतियाँ -हृदय कान्त दीवान<br/>11 सामाजिक स्तरीकरण पर षिक्षा के निजीकरण के प्रभाव-अमन मदान<br/>12 षिक्षा के लिए प्रतिबद्धता: क्या हम असफल हो रहे हैं?-हृदय कान्त दीवान<br/>13 भारत की प्राथमिक षिक्षा में सामाजिक असमानताएँ-मधुमिता बन्दोपाध्याय<br/>14 शैक्षिककरण से बहिष्कृत सड़क के बच्चे और कार्यरत बच्चे-सुष्मिता चटर्जी<br/>15 जाति और षिक्षा में चुनौतियाँ-पी.एस. कृष्णन<br/>खण्ड - 3<br/>भारतीय असमानताएँ और अल्पसंख्यक<br/>16 वंचित होने की क्रूर विरासत -हर्ष मन्दर<br/>17 मुस्लिम राजनीतिक विमर्श: एक टिप्पणी-हिलाल अहमद<br/>18 मुस्लिम समाज और महिलाएँ-जेनब बानू<br/>19 इज्तिहाद, तलाक और मुसलमान औरतें: भीतर से सुधार की सम्भावनाएँ-अमरीन<br/>खण्ड - 4<br/>विषमताओं के विविध प्रसंग<br/>20 सामाजिक परिवर्तन के तनाव और संकट-नरेष भार्गव<br/>21 भारतीय सामाजिक पुनर्रचना: समस्याएँ एवं सम्भावनाएँ-रामगोपाल सिंह<br/>22 भोजन का अधिकार: दक्षिण राजस्थान में घूघरी योजना का विष्लेषण-मनोज लोढ़ा<br/>23 भारत की विकास परियोजनाओं में विस्थापन -फरीदा शाह एवं पंकज शर्मा<br/>24 विस्थापन: व्याख्या और महिलाओं से जुड़े प्रष्न-अरुण चतुर्वेदी |
| 520 ## - SUMMARY, ETC. | |
| Summary, etc | आज के संदर्भ में असमानता एक अहम मुद्दे के रूप में उभरी है। राष्ट्रों, क्षेत्रों, कौमों और व्यक्तियों के बीच असमानताओं के बदलते संदर्भ पर न सिर्फ विचार हो रहा है वरन् कई प्रकार के तथ्य आधारित शोध भी विमर्श को समृद्ध कर रहे हैं। यह संकलन, असमानता पर विभिन्न महत्त्वपूर्ण वैश्विक सैद्धांतिक दृष्टियों को प्रस्तुत करता है। असमानता की सैद्धान्तिक विवेचनाओं से जुड़े नौ आलेख प्राकृतिक बनाम सामाजिक असमानता के परिप्रेक्ष्यों के बीच के संघर्ष तथा इसके व्यक्तिवाद व सामूहिकता व ‘सामाजिक पूँजी की अवधारणा’ से संबंध और श्वेत तथा अश्वेत के बीच के भेदभाव का विश्लेषण करते हैं। सैद्धांतिक रूप से असमानता को उदारवाद और सामाजिक न्याय के साथ रखकर देखने पर धार्मिक स्वतंत्रता, विशिष्टता के सिद्धान्त, लोक-बुद्धि और विवेक जैसी संकल्पनाओं पर विचार आवश्यक हो जाता है। बाकि के सात लेख असमानता की भारतीय दृष्टि व उसकी भारतीय परिस्थिति को समझने का प्रयास है। लेख दूसरी दुनिया अर्थात् परलोक के विचार के असमानता के साथ अंतर्संबंध और ‘सामाजिक न्याय’ के अर्थ में गरीब और अमीर के बीच की खाई तथा उनके बीच के व्यवहार पर लक्षित हैं। संकलन यह बात सामने रखता है कि आधुनिक भारतीय राजनीतिक चिन्तन के तहत ‘व्यक्ति, समाज और न्याय’ की सम्बद्धता को परखना महत्त्वपूर्ण है व इस पर व्यापक मंथन व चिंतन की आवश्यकता है। आधुनिक प्रजातांत्रिक व्यवस्थाओं की एक उदारवादी संकल्पना असमानता को खत्म कर समानता स्थापित करना है। ‘जीवन में समानता’ एक ऐसा वैश्विक सामाजिक स्वतः सिद्ध आदर्श, मूल्य एवं लक्ष्य है, जिसके प्रति सभी समाजों में प्रतिबद्धता दिखती है। समानता तक पहुंचने के अन्तर्विरोधी आयाम भारत के इस यथार्थ में प्रकट दिखते हैं कि राजनीतिक घोषणाओं, संवैधानिक प्रावधानों, व अकादमिक विमर्शों के बावजूद, सामाजिक यथार्थ में असमानता खत्म करने को मूर्त रूप देने की सम्भावनाएँ क्षीण हो रही हैं। यह संकलन इन्हीं सभी विमर्शों को प्रस्तुत करता है। |
| 546 ## - LANGUAGE NOTE | |
| Language note | Hindi |
| 650 ## - SUBJECT ADDED ENTRY--TOPICAL TERM | |
| Topical Term | Inequality |
| 700 ## - ADDED ENTRY--PERSONAL NAME | |
| Personal name | Sanjay, Lodha |
| 700 ## - ADDED ENTRY--PERSONAL NAME | |
| Personal name | Chaturvedi, Arun |
| 700 ## - ADDED ENTRY--PERSONAL NAME | |
| Personal name | Rajguru, Manoj |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Koha item type | Books |
| Full call number | Accession Number | Serial Enumeration / chronology | Volume | Lost status | Damaged status | Price effective from | Koha item type | Not for loan | Collection code | Withdrawn status | Home library | Current library | Shelving location | Date acquired | Cost, normal purchase price |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 305.8 D53B.2 | 65600 | Vol-2 | 0000-00-00 00:00:00 | 03/13/2026 | Books | Hindi Books | RCL | RCL | General Stacks | 03/13/2026 | 399.00 |


