Adhunikta, Uttar-Ashunikta Aur Sahityik Vimarsh /Gopiram Sharma
Material type:
TextPublication details: New Delhi: Radhika Books, 2025.Description: 234p, ; 22cmISBN: - 9789391819187
- H309 SH413A
| Item type | Home library | Collection | Call number | Materials specified | Status | Date due | Barcode | |
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Books
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RCL | Hindi Books | H309 SH413A (Browse shelf(Opens below)) | Available | 65503 |
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शोध:समकालीन हिन्दी उपन्यासों में उत्तर आधुनिकता
वर्तमान समय के साहित्य में कई विमर्श उभर कर सामने आ रहे हैं। विमर्शों द्वारा साहित्य में एक चेतना जाग्रत करने का कार्य किया जा रहा है। विमर्शों की इसी महत्ता का परिणाम है कि हिन्दी साहित्य में स्त्री और दलित जैसे मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा हो चुकी है। अब वृद्ध, विकलांग और किन्नर जैसे विषयों को विमर्श के दायरे में लाया जा रहा है। वृद्ध या बुजुर्ग हमारे समाज की महत्त्वपूर्ण इकाई हैं। जब वे अपनी सामाजिक भूमिका निभा चुके होते हैं, पीढ़ी का अंतर बताकर जब घर-परिवार के सदस्य उनकी बात को नकारने लगते हैं और जीवनानुभावों का, विचारधाराओं का जब अनादर होने लगता हैं तो बुजुर्ग अपने को समाज की एक व्यर्थ इकाई समझने लगता हैं। हिंदी कथा साहित्य में वृद्धों की समस्याओं को ‘वृद्ध विमर्श' के रूप में उठाया जा रहा है।
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