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Kavyalochan Vichar aur Vimarsh /Chanchal Chauhan

By: Material type: TextTextPublication details: New Delhi: Ananya Prakashan, 2025.Description: 204p. ; 24cmISBN:
  • 9789348409720
Subject(s): DDC classification:
  • H3109 C33K
Summary: यह पुस्तक चंचल चौहान के पिछले चालीस बरस के काव्यालोचन के कुछ चुने हुए लेखों का संग्रह है। इसमें कवि और कविताओं को देखने का एक अलग ही नज़रिया है जिसे आलोचक ने अपने विशाल अध्ययन और मौलिक चिंतन से अर्जित किया है। उन्होंने अपनी आलोचना की सृजनशीलता को 1976 में मुक्तिबोध की कविता के भाष्य से शुरू किया था, फिर 1979 में प्रकाशित 'जनवादी समीक्षा' में अपनी आलोचना पद्धति विकसित करके छायावाद से लेकर अपने समय तक की लंबी कविताओं की नयी व्याख्या से हिंदी काव्यालोचन को समृद्ध किया। इसके बाद लगातार कविता आलोचना पर उनके लेख तमाम साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे, जिनसे पाठकों को हिंदी कविता में आने वाले बदलावों की पहचान करायी गयी। यह पुस्तक हिंदी साहित्य में घटित हो रही उसी प्रक्रिया का अहसास कराती है, इसीलिए हिंदी कविता में रुचि रखने वाले हर पाठक के लिए एक अनिवार्य कृति है।
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Books Books RCL Hindi Books H3109 C33K (Browse shelf(Opens below)) Available 65597

यह पुस्तक चंचल चौहान के पिछले चालीस बरस के काव्यालोचन के कुछ चुने हुए लेखों का संग्रह है। इसमें कवि और कविताओं को देखने का एक अलग ही नज़रिया है जिसे आलोचक ने अपने विशाल अध्ययन और मौलिक चिंतन से अर्जित किया है। उन्होंने अपनी आलोचना की सृजनशीलता को 1976 में मुक्तिबोध की कविता के भाष्य से शुरू किया था, फिर 1979 में प्रकाशित 'जनवादी समीक्षा' में अपनी आलोचना पद्धति विकसित करके छायावाद से लेकर अपने समय तक की लंबी कविताओं की नयी व्याख्या से हिंदी काव्यालोचन को समृद्ध किया। इसके बाद लगातार कविता आलोचना पर उनके लेख तमाम साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे, जिनसे पाठकों को हिंदी कविता में आने वाले बदलावों की पहचान करायी गयी। यह पुस्तक हिंदी साहित्य में घटित हो रही उसी प्रक्रिया का अहसास कराती है, इसीलिए हिंदी कविता में रुचि रखने वाले हर पाठक के लिए एक अनिवार्य कृति है।

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