/ 3



Local cover image
Local cover image
Amazon cover image
Image from Amazon.com
Image from Google Jackets
Image from OpenLibrary

Hindi Sahitya Ka Praichay / Acharya Chatursen

By: Material type: TextTextPublication details: New Delhi: Ananaya Prakashan, 2024.Description: 152p. ; 22cmISBN:
  • 9788119141623
DDC classification:
  • H309 C324H
Contents:
प्रथम अध्याय: 1. हिन्दी साहित्य का प्रारम्भिक स्प 2. सिद्ध-सामंत युग, 3. इस युग के सिद्ध, जैन और नाथ साहित्य, 4. सिद्ध-सामन्त युग का लोक साहित्य, 5. वीरगाथा और रासो साहित्य 6. शार्गधर, खुसरो और विद्यापति, 7. चारण साहित्य दूसरा अध्याय : 1. भक्ति-काल, २. निर्गुण भक्ति- ज्ञानारूपी शाखा 3. ज्ञानमार्ग प्रेममागी शाखा, 4. सगुण घारा-कृष्ण-भक्ति, 5. भक्ति मार्ग- रामभक्ति शाखा तीसरा अध्याय : अलंकृत काल: 1. श्रृंगार का प्रारम्भ, 2. रीति-साहित्य का निर्माण, 3. श्रृंगार काल पर एक दृष्टि चौथा अध्याय: आंग्ल-प्रभाव-काल: 1. आंग्ल-आगमन, 2. पूर्व काल का गद्य, 3. हिन्दी गय के चार उन्नायक, 4. अंग्रेजी भाषा और पाश्चात्य संस्कार पांचवां अध्याय : भारतेन्दु काल : 1. भारतेन्दु, उनकी प्रतिभा और साहित्य, 2. इस युग के साहित्य-शिल्पी, 3. भारतेन्दु काल की साहित्य-संपदा छठा अध्याय: त्रिविध प्रभाव-काल 1. त्रिविध प्रभाव, 2. इस युग के साहित्य जन, 3. इस काल का साहित्य धन सातवां अध्याय : द्विवेदी-युग : 1. सिंहावलोकन, 2. द्विवेदी और उनके कार्य, 3. इस काल के साहित्य परिजन, 4. गद्य-पद्य आठवां : नव-युग : 1. सिंहावलोकन, 2. गद्य में भावावेश, 3. पद्य में महानाद, 4. गद्य-भूमि, 5. पद्य-भूमि, पत्र और राष्ट्रभाषा नवां अध्याय : महत्तर-युग
Tags from this library: No tags from this library for this title. Log in to add tags.
Star ratings
    Average rating: 0.0 (0 votes)

हिंदी साहित्य का परिचय

प्रथम अध्याय: 1. हिन्दी साहित्य का प्रारम्भिक स्प 2. सिद्ध-सामंत युग, 3. इस युग के सिद्ध, जैन और नाथ साहित्य, 4. सिद्ध-सामन्त युग का लोक साहित्य, 5. वीरगाथा और रासो साहित्य 6. शार्गधर, खुसरो और विद्यापति, 7. चारण साहित्य दूसरा अध्याय : 1. भक्ति-काल, २. निर्गुण भक्ति- ज्ञानारूपी शाखा 3. ज्ञानमार्ग प्रेममागी शाखा, 4. सगुण घारा-कृष्ण-भक्ति, 5. भक्ति मार्ग- रामभक्ति शाखा तीसरा अध्याय : अलंकृत काल: 1. श्रृंगार का प्रारम्भ, 2. रीति-साहित्य का निर्माण, 3. श्रृंगार काल पर एक दृष्टि चौथा अध्याय: आंग्ल-प्रभाव-काल: 1. आंग्ल-आगमन, 2. पूर्व काल का गद्य, 3. हिन्दी गय के चार उन्नायक, 4. अंग्रेजी भाषा और पाश्चात्य संस्कार पांचवां अध्याय : भारतेन्दु काल : 1. भारतेन्दु, उनकी प्रतिभा और साहित्य, 2. इस युग के साहित्य-शिल्पी, 3. भारतेन्दु काल की साहित्य-संपदा छठा अध्याय: त्रिविध प्रभाव-काल 1. त्रिविध प्रभाव, 2. इस युग के साहित्य जन, 3. इस काल का साहित्य धन सातवां अध्याय : द्विवेदी-युग : 1. सिंहावलोकन, 2. द्विवेदी और उनके कार्य, 3. इस काल के साहित्य परिजन, 4. गद्य-पद्य आठवां : नव-युग : 1. सिंहावलोकन, 2. गद्य में भावावेश, 3. पद्य में महानाद, 4. गद्य-भूमि, 5. पद्य-भूमि, पत्र और राष्ट्रभाषा नवां अध्याय : महत्तर-युग

Hindi

There are no comments on this title.

to post a comment.

Click on an image to view it in the image viewer

Local cover image

Find us on the map

Contact Us

RAMANUJAN COLLEGE UNIVERSITY OF DELHI, KALKAJI, NEW DELHI 110019
library@ramaanujan.du.ac.in
011-35002219
https://library.ramanujancollege.ac.in/
ramanujancollegelibrary
                                 
Customized & Maintained by Department of Library